Nandghar Yojna of Anganwadi Kendra

Nandghar Yojna had been launched by Department of Women and Child Development in 2015.  The Scheme aimed at utilizing  community cooperation in modernizing Anganwadi Kendra’s. Through this scheme, NGO’s , Corporates, donors can adopt an Anganwadi Kendra and help in its transformation.nandghar

क्या है नंद घर योजना 

सामुदयिक सहयोग के ज़रिये आंगनवाड़ी केन्द्रों को आधुनिक बनाने के लिए ‘नंद घर योजना’ बनायी गयी है।नन्दघर योजना के तहत समाज का कोई भी व्यक्ति, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं, ट्रस्ट, दानदाता या कॉरपोरेट आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लेकर अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का सरोकार निभा सकते हैं।  

 

इसके लिए विभाग व संस्था के मध्य एमओयु साइन किया जायेगा। जिसके तहत वे पांच वर्षों तक इनके संचालन के लिए फंडिंग करेंगे। इन केन्द्रों में वे सभी गतिविधियाँ वैसी ही चलेंगी जो महिला एवं बल विकास द्वारा निर्धारित की गयी है। यदि कोई किसी प्रकार का नवीन परिवर्तन लाना चाहे तो बाल विकास परियोजना अधिकारी से विचार विमर्श किया जा सकता है।

 

The State Government has recently released a review of the Nandghar Yojna Scheme, below are few of the important points.

नन्दघर योजना के शुरूआत से लेकर अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में अनेक समाजसेवियों, दानदाताओं, स्वयं सेवी संगठनों व कॉरपोरेट ने अपना सामाजिक दायित्व निभाते हुए प्रदेश की अनेकाें आंगनबाड़ी केन्द्रों को नन्दघर के रूप में विकसित किया है

  • वेदान्ता फाउण्डेशन ने बाडमेर जिले में परियोजना बायतु, गुढामालानी, सिणधरी, नोखडा में कुल 50 आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लिया है। फाउण्डेशन ने इन केन्द्रों के भवन निर्माण के साथ साथ आधुनिक पूर्व प्राथमिक शिक्षा महिला स्वरोजगार प्रशिक्षण एवं आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए एम.ओ.यू. किया है। इनमें से 25 आंगनबाड़ी केन्द्राें का आकर्षक डिजाईन एवं आधुनिक साजसज्जा के साथ निर्माण किया जा चुका है।
  • श्री शनिधाम ट्रस्ट आलावास पाली द्वारा परियोजना सोजत सिटी के 100 आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लिया गया है। ट्रस्ट ने इन केन्द्रों पर मरम्मत व रंगरोगन करवाने के साथ साथ विद्युत कनेक्शन भी उपलब्ध करवाया है इसके अलावा बर्तन, किताबें एवं अन्य शिक्षण सामग्री भी ट्रस्ट द्वारा उपलब्ध करवायी गई है।
  • श्री सीमेंट द्वारा पाली जिले के जैतारण एवं रायपुर परियोजना के 26 आंगनबाड़ी केन्द्र गोद लिये गये है। इन केन्द्रों के लिए प्री स्कुल किट, बर्तन, अन्य सामग्री वितरण के साथ-साथ भवन की मरम्मत व रंगरोगंन कार्य करने हेतु गोद लिये गये हैं। जिले में अलग-अलग दानदाताआें द्वारा अन्य 64 आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लेकर फर्नीचर, शिक्षण व खेलकूद सामग्री उपलब्ध करवायी है और भवनों की मरम्मत व रंगरोगन का कार्य करवाया है।
  • राजसमन्द जिला- वेदान्ता एवं जिंक फाउण्डेशन लिमिटेड ने राजसमन्द जिले के तीन परियोजनाओं (राजसमन्द, खमनोर, रेलमगरा) में 504 आंगनबाड़ी  केन्द्रों को गोद लेकर इन केन्द्रो पर यूनिफॉर्म, टॉयलेट, बर्तन, वेट मशीन एवं अन्य सामग्री उपलब्ध कराई।
  • उरमूल सीमान्त समिति, बज्जू, बीकानेर द्वारा कोलायत व लूणकरणसर परियोजना की 121 आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लेकर इन केन्द्रों पर मरम्मत व रंगरोगन के साथ साथ अन्य सामग्री उपलब्ध करायी गई।
  • वेदान्ता फाउण्डेशन द्वारा सीकर जिले के श्रीमाधोपुर व रींगस परियोजनाओं के 226 आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लिया है। फाउण्डेशन ने इन केन्द्रों पर प्री-स्कूल किट मेडिसिन किट, पूरक पोषाहार व अन्य सामग्री उपलब्ध करायी।
  • लुपिन ह्यूमन वैलफेयर एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन, भरतपुर द्वारा भरतपुर सवाईमाधोपुर, करौली, धौलपुर एवं अलवर जिले के चिन्हित 100 आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लिया गया है। लुपिन द्वारा गोद लिये गये केन्द्रों में भवनों की मरम्मत, साजसज्जा, रंगरोगन एवं सौन्दर्यकरण के अन्य कार्य करवाये गये हैं।
  • जालौर जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों से जुडे़ स्थानीय निवासियों द्वारा 1-2 केन्द्रों को गोद लेकर सामुदायिक सहभागिता व जिम्मेदारी का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। जिले में स्थानीय दानदाताओं व भामाशाह द्वारा कुल 185 आंगनबाड़ी केन्द्र गोद लेकर इनमें मरम्मत, रंगरोगन व साजसज्जा कराने के साथ साथ फर्नीचर, प्री-स्कूल किट, मेडिसिन किट व अन्य सम्बंधित सामग्री उपलब्ध करवायी है।